आचार्य तुलसी के 23 अनमोल विचार हिंदी मैं Thoughts of Acharya Tulsi in Hindi

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आचार्य तुलसी के अनमोल विचार हिंदी मैं Thoughts of Acharya Tulsi in Hindi: अगर आप आचार्य तुलसी को जानते होंगे तो अछि बात है और अगर आप नहीं जानते है तो आप जान ले की आचार्य तुलसी जी एक जैन संत थे इनका जन्म 20 अक्टूबर 1914 को हुआ था | ये एक जैन लेखक थे इन्होने अपनी कार्य शेली से जैन धर्म के विश्वविध्यालय के प्रवर्तक है इन्होने 100 से भी ज्यादा पुस्तके लिखी है | इनकी जीवन लीला 23 जून 1997 में हुयी |

आचार्य तुलसी के अनमोल विचार हिंदी मैं Thoughts of Acharya Tulsi in Hindi

Thoughts of Acharya Tulsi

आज हम इनके कुछ अनमोल विचारो के बारे में बात करेंगे इन्होने अपनी बुध्धि मत्ता से बहुत साड़ी किताबे लिखी और वह एक सफल व्यक्ति बने जो आज के व्यक्तियो को उनसे सीख लेनी चाहिए | आज हम आपको इनके कुछ विचार प्रस्तुत कर रहे है मुझे आशा है की आपको पसंद आएंगे |

Thoughts of Acharya Tulsi


विचार 1:  सुंदर वेष देखकर न केवल मूर्ख अपितु चतुर मनुष्य भी धोखा खा जाते हैं |सुंदर मोर को ही देख लो उसका वचन तो अमृत के समान है लेकिन आहार साँप का है |

विचार 2:  हे मनुष्य ,यदि तुम भीतर और बाहर दोनों ओर उजाला चाहते हो तो मुखरूपी द्वार की जीभरुपी देहलीज़ पर राम-नामरूपी मणिदीप को रखो |

विचार 3:  शत्रु को युद्ध में उपस्थित पा कर कायर ही अपने प्रताप की डींग मारा करते हैं |


विचार 4: स्वाभाविक ही हित चाहने वाले गुरु और स्वामी की सीख को जो सिर चढ़ाकर नहीं मानता ,वह हृदय में खूब पछताता है और उसके हित की हानि अवश्य होती है |

विचार 5: मुखिया मुख के समान होना चाहिए जो खाने-पीने को तो अकेला है, लेकिन विवेकपूर्वक सब अंगों का पालन-पोषण करता है |

विचार 6:  मंत्री, वैद्य और गुरु —ये तीन यदि भय या लाभ की आशा से (हित की बात न कहकर ) प्रिय बोलते हैं तो (क्रमशः ) राज्य,शरीर एवं धर्म – इन तीन का शीघ्र ही नाश हो जाता है |

विचार 7: मीठे वचन सब ओर सुख फैलाते हैं |किसी को भी    वश में करने का ये एक मन्त्र होते हैं इसलिए मानव को चाहिए कि कठोर वचन छोडकर मीठा बोलने का प्रयास करे |

विचार 8: जो मनुष्य अपने अहित का अनुमान करके शरण में आये हुए का त्याग कर देते हैं वे क्षुद्र और पापमय होते हैं |दरअसल ,उनका तो दर्शन भी उचित नहीं होता |

विचार 9:  मनुष्य को दया कभी नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि दया ही धर्म का मूल है और इसके विपरीत अहंकार समस्त पापों की जड़ होता है|मनुष्य को दया कभी नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि दया ही धर्म का मूल है और इसके विपरीत अहंकार समस्त पापों की जड़ होता है|मनुष्य को दया कभी नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि दया ही धर्म का मूल है और इसके विपरीत अहंकार समस्त पापों की जड़ होता है|

विचार 10:  प्रलोभन और भय का मार्ग बच्चों के लिए उपयोगी हो सकता है| लेकिन सच्चे धार्मिक व्यक्ति के दृष्टिकोण में कभी लाभ हानि वाली संकीर्णता नहीं होती|

विचार 11: मनुष्य की धार्मिक वृत्ति ही उसकी सुरक्षा करती है|

विचार 12: धार्मिक व्यक्ति दुःख को सुख में बदलना जानता है|

विचार 13:  धार्मिक वृत्ति बनाये रखने वाला व्यक्ति कभी दुखी नहीं हो सकता और धार्मिक वृत्ति को खोने वाला कभी सुखी नहीं हो सकता|

विचार 14:  प्रलोभन और भय का मार्ग बच्चों के लिए उपयोगी हो सकता है| लेकिन सच्चे धार्मिक व्यक्ति के दृष्टिकोण में कभी लाभ हानि वाली संकीर्णता नहीं होती|

विचार 15:  आग्रह हर समन्वय को कठिन बनाता है, जबकि उदारता उसे सरल ।

विचार 16:  धार्मिक वृत्ति बनाये रखने वाला व्यक्ति कभी दुखी नहीं हो सकता और धार्मिक वृत्ति को खोने वाला कभी सुखी नहीं हो सकता|

विचार 17:  लक्ष्य निश्चित हो, पाव गतिशील हों तो मंजिल कभी दूर नहीं होता।

विचार 18:  धर्म का काम किसी का मत बदलना नहीं , बल्कि मन बदलना है ।

विचार 19: सफलता का सबसे बड़ा सूत्र है व्यक्ति का अपना पुरुषार्थ ।

विचार 20: मानव वह होता है जो नए पाठ का निर्माण करे ।

विचार 21: भावी पीड़ी को संस्कारी बनाए रखना विकास की सशक्त शृंखला है ।

विचार 22:  चिंता नहीं चिंतन करो
व्यथा नहीं व्यवस्था करो
प्रसंसा नहीं प्रस्तुति करो

विचार 23:  जनता सरकार को बनाती है, सरकार जनता को नही….। इसलिए सरकार के पिछलग्गू मत बनो। हर छोटे मोटे कार्य हेतु सरकार की मेहरबानियो के गुलाम मत बनो ।

आखरी विचार: में आशा करता हु की आपको आचार्य तुलसी के अनमोल विचार हिंदी मैं Thoughts of Acharya Tulsi in Hindi पसंद आये होंगे अगर आप ये आर्टिकल सोशल   मीडिया पर अपने दोस्तों को टैग   करके भी शेयर कर सकते हो और आप अपनी फीलिंग निचे कमेंट बॉक्स में लिख  सकते हो | धन्यबाद 

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